Tuesday, August 7, 2018

Desh Bhakti Poem In Hindi For Class 1 3 5 6-देश भक्ति पोएम


Desh Bhakti Poem in Hindi, desh bhakti kavita in Hindi for class 1, 2, 3, 4, 5.patriotic poems. आज हम यहाँ पर देशभक्ति की कविताए स्टूडेंट के लिए लेकर आए है.

Desh Bhakti Poem In Hindi

1. देश भक्त की कविता

आज़ादी का दिन है आज
यहाँ न चले अब किसीका राज
प्रेम, अहिंसा का यहाँ रिवाज़
पर शत्रु तुम दूर ही रहना देश हमरा वीरों का समाज

आपस में न करो बवाल
पहले खुद से करो सवाल
देश भक्त तुम खुद को कहते
क्यूँ धरती के टुकड़े करते

सीमा पे जो खड़े जवान
उन्ही के कारन है देश महान
देश के लिए वे देते प्राण
प्रान्त की वे बात न करते सारा देश एक सामान

छबीस जनवरी और पंद्रह अगस्त
बस यही दो दिन क्यूँ रहते मस्त
रोज करो तुम देश की पूजा
अपने देश सा न कोई दूजा

सीचे खेत बोये धान
जिनको कहते है हम किसान
देता है कोई इन पर भी ध्यान?
ये न हो तो, न रहेगा का जान

देश बाँटने की जो करे बात
कभी न देना उसका साथ
देश भक्त को खरीद सके, नहीं यहाँ किसी की अवकात
कविता लिख कर मैंने कहदी, अपने सारी दिल की बात

आज़ादी का दिन है आज
यहाँ न चले अब किसीका राज

Patriotic Poems in Hindi:-

ज़माने भर में मिलते हे आशिक कई ,
मगर वतन से खूबसूरत कोई सनम नहीं होता ,
नोटों में भी लिपट कर, सोने में सिमटकर मरे हे कई ,
मगर तिरंगे से खूबसूरत कोई कफ़न नहीं होता


Patriotic Poems

आन,बान की शान की है यह,गौरव की अभिमान की है,
वीर सपूतों की जन्मभूमि यह,मिट्टी हिंदुस्तान की है।

राम कृष्ण की कर्मभूमि है,वीर कर्ण के दान की है,
पांडवों के महाभारत की यह,द्रौपदी के अपमान की है।

रानी लक्ष्मीबाई की है यह,शिवाजी के प्रण प्राण की है,
राणा प्रताप की प्रतिज्ञा की यह,सिंह भगत के बलिदान की है।

ऋषियों के गुण ज्ञान की है यह,तानसेन की तान की है,
तुलसी,मीरा,सूर,कबीर,बिहारी और रसखान की है।

यह मिट्टी है हिन्दू,मुस्लिम,सिख,बौद्ध,क्रिस्तान की है,
यह मिट्टी तो ईसा,नानक,बुद्ध,खुदा,भगवान की है।

भाषा,बोली,संस्कृति की,संस्कारों की खान की है,
यह भूमि है धर्म,कर्म की,प्रेम,ज्ञान,विज्ञान की है।

ये मिट्टी है,भगत,जवाहर,आज़ाद,सुभाष महान की है,
विवेकानंद के सपनों की यह,बापू के अवदान की है।

यह भूमि है विरासतों की,सभ्यता की पहचान की है,
वन्दे मातरम की धरती यह,जन-गण-मन के गान की है।

सबसे बड़े गणतंत्र की है यह,प्यारे तिरंगे की शान की है,
यह मिट्टी हर इन्सान की है,यह 'जीत' के सम्मान की है।

ऐ मेरे वतन के लोगों तुम खूब लगा लो नाराये शुभ दिन है हम सब का लहरा लो तिरंगा प्यारापर मत भूलो सीमा पर वीरों ने है प्राण गँवाएकुछ याद उन्हें भी कर लो जो लौट के घर न आये....

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