Wednesday, July 18, 2018

Happy Independence Day 2018-15 अगस्त स्वतंत्रता दिवस

Happy Independence Day 2018-15 अगस्त स्वतंत्रता दिवस


Happy Independence Day 2018
15 अगस्त स्वतंत्रता दिवस


भारत 15 अगस्त १९४७ में अंग्रजो के दास्यात्व से मुक्त हुआ | इस आजादी के लिए न जाने कितने ही वीरो ने अपने प्राण हसकर नौछावर कर दिए | अंग्रजो ने भारत पर करीब करीब 150 साल तक राज किया था |15 अगस्त स्वतंत्रता दिवस  के इस विशेष औचित्य पर हम हमारे इतिहास पर थोड़ी नजर दौड़ते है |

इन 150 साल के गुलामी में भारत का बहुत ही शोषण हुआ | अंग्रजो ने भारत की अर्थव्यस्था को ही तबाह कर दिया | ऐसा नहीं था की अंग्रजो से पहले किसी विदेशियो ने यहाँ राज नहीं किया था | मुगलों ने तो कई शतको तक यहाँ राज किया था | लेकिन वो यहाँ आये यही राज किया और वो यही बस गए | लेकिन अंग्रेजो ने यहाँ आये लेकिन उन्होंने यहाँ का सारा धन लुट के अपने देश इंग्लैंड को भेज दिया |

18 वी सदी तक दुनिया का सबसे आमिर कहलवाने वाल भारत अंग्रेजो ने १९४७ तक कंगाल कर दिया था | अंग्रेज भारत में आये तो थे सिर्फ व्यापर करने के लिए लेकिन  यहाँ की राजकीय अस्थिरता का फायदा उठाकर उन्होंने भारत का राज्य हतिया लिया |

भारत का राज्य हथियाने के बाद अंगेजो ने जो बरबरियत यहाँ पर शुरू की उसकी दस्ता कही और नही मिलती|  अंगेजो ने जिस जिस प्रकार से भारत का शोषण कर सकते थे,जिस जिस प्रकार से भारतीय जनता पर आत्याचार कर सकते थे वो सब किये |

अगर वैसे देखा जाए तो भारतीयों की तुलना में ब्रिटिशो की संख्या बहुत ही नगण्य थी | लेकिन फिर भी अंग्रेजो ने बड़ी ही चतुराई के साथ यहाँ पर एक नहीं दो नहीं 150 साल तक राज किया | ब्रिटिश बहुत ही चतुर थे| उन्होंने यहाँ राज करने के लिए साम ,दाम ,दंड ,नीति का प्रयोग किया | यहाँ पर उन्होंने हिन्दू और मुस्लिमो में दरार पैदा की ताकि हिन्दू और मुस्लिम कभी भी उनके खिलाफ एक ना हो सके |

चलिए देखते है की आखिर अंग्रेजो ने भारत की राजनीती में कैसे शिरकाव किया ,कैसे यहाँ पर बरबरियत ढाई ,कैसे हमारे वीर स्वातंत्र्य वीरो ने उनके खिलाफ आंदोलन शुरू किये कैसे उन्होंने भारत माता की आजादी के लिए अपने घर बार यहाँ तक अपने प्राणों की भी परवाह नहीं की |

अंग्रेज भारत में मुग़ल बादशाह जहाँगीर के काल से ही यहाँ आते रहे है |इंग्लैंड में भारत में व्यापर करने के लिए ईस्ट इंडिया नमक कंपनी स्थापन की थी | लेकिन तब उनका मकसद सिर्फ सिर्फ व्यापर करना था |क्योकि तब मुगल शाशको का बहुत ही शक्तिशाली राज्य हुआ करता था | इसलिए उन्होंने अपना ध्यान सिर्फ व्यापर पर ही केन्द्रित कर दिया | वह मुगल बादशाहों को महंगे नजराने पेश करते और बदले में उनसे व्यापर में छुट पाते थे | कई दिनों तक यही सिलसिला शुरू रहा और अंगेज शांतता तरीके से व्यापर करते रहे |

समय बिताता गया और मुगल सम्राट औरंगजेब की मृत्यु के बाद मुगल साम्राज्य क्षीण हो गया | भारत में कोई भी शक्तिशाली राज्य नहीं बचा था | जो कोई भी छोटे बड़े राज्य थे वो आपस में ही लड़ रहे थे | इसी मौके को देखकर ब्रिटिशो ने भारतीय राजनीती में अपने पैर पसारने शुरू कर दिए | एक एक करके सारे छोटे छोटे राज्यों को अपने राज्य से जोड़कर ईस्ट इंडिया कंपनी ने पुरे भारत में (गोवा छोड़कर ) अपना राज्य फैला दिया |

जैसे ही पुरे भारत में ईस्ट इंडिया का राज्य  फ़ैल गया,उन्होंने भारत में अत्याचार और शोषण शुरू कर दिया | यहाँ के किसानो पर अवव्हारिक टैक्स लगा दिए | जीवनावश्यक वस्तु वो पर भी कई तरह के टैक्स लगा दिए गए |
अंग्रजो ने इंग्लैंड में हुए उद्योग क्रांति के वजह से कम समय में  ज्यादा उत्पादन होने लगा था | और वह माल भारत में बेचने के लिए उन्होंने वहा से आने वाले उत्पादों पर टैक्स बहुत ही कम कर दिए और भारत से जाने वाले माल पर टैक्स बड़ा दिए इसके परिणाम स्वरुप यहाँ के सारे कारागीर और छोटे मोटे उद्योग बंद हो गए | इस तरह अंग्रजो ने भारत के अर्थव्यवस्था पर ही अघात करके उसे तबाह कर दिया |

इन अत्याचारों और शोषण के खिलाफ अंग्रेजो के खिलाफ पहला गुस्सा फुट पड़ा १८५७ में | १८५७ में  झाशी की राणी लक्ष्मीबाई ,तात्या टोपे ,नानासाहेब पेशवा ,कुवरलाल ,आदि वीरो ने अंग्रेज शाशन के खिलाफ युद्ध छेड़ दिया | इन सब वीरो ने बहुत ही वीरता दिखाई लेकिन अंग्रेजी सेना के आधुनिक हथियार और सुसज्जित सेना के आगे यह लढाई सफल नहीं हो सकी | लेकिन इस लढाई ने भारतीयों के मन में एक आशा की किरण जगाने का काम किया |

इस १८५७ के उठाव के बाद अंग्रेज सरकार हिल गयी | इंग्लेंड की राणी ने अपना एक जाहीरनामा पेश कर दिया जिसमे भारतीयों के लिए कई आश्वाशन दिए गए | और भारत की सत्ता ईस्ट इंडिया कंपनी से निकलकर इंग्लैंड की राणी के हाथ में आ गई | लेकिन अंग्रजो की बरबरियत और शोषण भारतीय जनता पर बरक़रार रह यदायापी बहुत बड गया | इधर भारत में १८५७ के उठाव के बाद स्वातंत्र्य आन्दोलन की कमान राजा महाराजो के हाथ से निकलकर नव युवा के हाथ में आ गयी |

उसके बाद  अंग्रेजो से आजादी और अपनी मांगे पूरी करने के लिए इस नव युवको को एक संघटन की जरुरत महसूस होने लगी | इसी के चलते १८८५ में भारतीय राष्ट्रिय कांग्रेस की स्थापना की गयी | कांग्रेस के द्वारा अंग्रजो से भारतीयों के लिए न्याय और हक़ के लिए मांगे की जानी लगी |

लेकिन अंग्रेजो से इन मांगे पूरी ण होते देख कोंग्रेस में दो विचार धराये पनपने लगी थी जहाल और मवाल  | मवाल विचारधारा का मानना था की अंग्रेजो पर विश्वास रखकर उन्हें हमारे मांगो के निवेदन देने से अंग्रेज उनकी मांगे पूरी करेंगे | इसलिए ये गुट सीर्फ निवेदन और पत्रों से मांगे करने में विश्वास रखता था |

जहाल विचारधारा वाले युवा वो को अंग्रेजो पर बिलकुल भी विश्वास नहीं रहा था | इसलिए उनका मानना था की अंग्रेजो के खिलाफ आंदोलन और उनका प्रतिकार कर उनसे हमारी मांगे मनवा लेनी चाहिए | कांग्रेस में  दादा भाई नौरोजी ,लोकमान्य तिलक ,मोतीलाल नेहरू , गोपाल कृष्ण गोखले आदि प्रमुख नेता थे| बाद में पंडित जवाहरलाल नेहरू ,सुभाष चन्द्र बोस ,महात्मा गाँधी ,सरदार वल्लभभाई पटेल आदि महत्वपूर्ण नेता कांग्रेस से जुड़ गए थे |

दूसरी तरफ भारतीय युवा वो का एक ऐसा भी वर्ग था जिनके मन में अंग्रेजो के खिलाफ भारी रोष था | अंग्रेजो की भारतीय जनता पर होने वाले जुल्म और सितम देखकर उनका खून खौल उठता था | और इनका मत था की अंग्रेजो को भी उनकी ही भाषा में जवाब देना चाहिए |

इसी विचारधारा वाले युवा वो को क्रन्तिकारी कहा जाता है | इन देशभक्त युवावो में भगतसिंग ,राजगुरु ,सुखदेव ,चंद्रशेखर आजाद ,बटुकेश्वर दत्त ,कल्पना दत्त ,प्रीति वाडेकर, आदि क्रन्तिकारी देशभक्त युवा शामिल थे | इन क्रांति वीरो ने भारत माता की स्वतंत्रता के लिए अपने परिवार और अपने प्राणों की भी परवाह न करते हुए देश के लिए अपनी जान कुर्बान कर दी | ऐसे वीरो को हमारा शत शत नमन |

लोकमान्य तिलक के बाद देश की राजनीती में महात्मा गाँधी का पदार्पण हो गया | महात्मा गाँधी जी ने अंगेजो के खिलाफ  शांतिपूर्ण तरीके से कई सत्याग्रह और आंदोलन किए जिसके कारन अंग्रेजो ने उन्हें कई साल तक जेल में रखा |

भारत के आजादी की कहानी सुभाष चन्द्र बोस जी के बिना पूरी ही नहीं हो सकती | भारतीय स्वतंत्रता आन्दोलन में सुभाष चन्द्र बोस का बहुत ही अमूल्य योगदान रहा है |  बोस जी ने  कांग्रेस से इस्तीफा देने के बाद जापान ,जर्मनी ,और इटली जैसे राष्ट्रों से भारत की आजादी के लिए सहायता पाने का प्रयास किया |

फिर जापान में रासबिहारी बोस द्वारा स्थापित आझाद हिन्द सेना का नेतृत्व करके इस सेना के सहायता से अंदमान और निकोबार द्वीपों को  आजाद कर दिया था | और फिर यह आझाद हिन्द सेना भारत में प्रवेश करने ही वाली थी की जापान ने शरणागति ले ली इसलिए आझाद हिन्द सेना को सहायता आना बंद हुआ | इसलिए इसे पीछे हटाना पड़ा |

 बाद में ऐसा माना जाता है की सुभाष चन्द्र बोस जी का एक विमान दुर्घटना में निधन हो गया |
इस घटना के बाद पुरे देश में आजादी की लहर दौड़ पड़ी | ब्रिटिश सेना में शामिल भारतीय नाविक सैनिको ने भी बगावत शुरू कर दी | इस परस्थिति को देखते हुए अंग्रेजो को यह अहसास होने लगा की अब भारत में उनकी सत्ता संभालना आसान नहीं है | इसलिए उन्होंने भारत को आजादी देने का फैसला कर दिया और भारत १९४७ को स्वतंत्र हो गया |

भारत की स्वतंत्रता हमारे लिए और दुनिया के लिए एक स्फूर्ति लाने वाला क्षण था |  हमारा यह परम कर्तव्य है की भारत की स्वतंत्रता के लिए अपने प्राण की भी परवाह न करने वाले स्वातंत्र्य वीरो ,क्रन्तिकारो को हमेशा याद करे और उनके सपनो का भारत साकार करने में अपना योगदान दे |
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