Monday, July 16, 2018

15 अगस्त स्वतंत्रता दिवस पर भाषण-Independence Day Speech In Hindi

स्वतंत्रता दिवस 15 अगस्त शायरीकविता ,भाषण निबंध:Independence Day Speech In Hindi

नमस्कार दोस्तों आज हम आपके लिए  15 अगस्त भारतीय स्वतंत्रता दिवस पर भाषण लाए है अब 15 अगस्त बहुत ही नजदीक आ रहा है ,तो  आपको अगर आपके स्कूल या कॉलेज में 15 अगस्त भारतीय स्वतंत्रता दिवस पर भाषण करना हो तो आप बहुत ही सही जगह पर आये है |  इस पोस्ट में हम आपके लिए अलग अलग ४ प्रकार के भाषण 15 अगस्त भारतीय स्वतंत्रता दिवस पर दे रहे है तो चलिए देखते है स्वतंत्रता दिवस पर भाषण:
स्वतंत्रता दिवस पर भाषण 15 August Independence Day Speech. स्वतंत्रता दिवस 15 अगस्त शायरीकविता ,भाषण निबंध.

15 अगस्त भारतीय स्वतंत्रता दिवस पर भाषण


भारतीय स्वतंत्रता दिवस पर भाषण


इस स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि , कार्यक्रम के अध्यक्ष महोदय ,सभी पूज्य गुरुजन वर्ग और मेरे प्यारे विद्यार्थी मित्रो तथा इस महत्वपूर्ण अवसर पर उपस्थित सभी हस्तियों को मेरा सादर प्रणाम | हम सब लोग आज यंहा पर भारतीय स्वतंत्रता दिवस की ख़ुशी मनाने और  हमारी भारत माता को आजादी दिलाने के लिए अपना खून बहा देने वाले वाले वीरो को नमन करने के लिए यहाँ उपस्थित हुए है | मै आज आपको मेरे इस छोटे से भाषण में 15 अगस्त भारतीय स्वतंत्रता दिवस पर उन वीरो के शोर्य और पराक्रम की गाथा सुनाने का प्रयास करूँगा |

    आज का दिन हम सब भारतीयों के लिए एक गर्व का क्षण है | इस साल हम भारत के आजादी का ७२ वा साल मना रहे है | हमारी भारत माता इसी दिन 15 अगस्त १९४७ को ब्रिटिशो के गुलाम गिरी से आजाद हुयी थी | तब से आज तक आज भारत ने बहुत ही उन्नति की है | लेकिन इस अवसर पर हमारे वीरो को और उनके प्पराक्रम को भूलना नहीं चाहिए |  

 भारत के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने स्वतंत्र भारत का पहला तिरंगा लाल किले पर  रात को १२ बजे फहराया था और कहा था की आज सारी दुनिया सो रही है ,लेकिन  आज भारत का एक नया जन्म हुआ है | भारत 150 से साल के अंगेजो के जोखड से मुक्त हुआ है और आजादी की नयी साँस ले रहा है |

     अंग्रेज बहुत सालो पहले  भारत में व्यापारी बन के आये  थे| उनका पहले तो यहाँ पर राज करने का कोई इरादा नहीं था | यहाँ मुगलों का बहुत ही शक्तिशाली राज्य हुआ करता था | इसलिए अंग्रजो ने पहले तो सिर्फ अपना ध्यान सिर्फ व्यापर पर ही केन्द्रित कर दिया था | अंग्रेज व्यापारी मुगल बादशाहों को कीमती नजराने पेश करते थे और उसके बदले में वो यहाँ पर व्यापर के लिए खास छुट पाते थे |

        लेकिन धीरे धीरे समय बितता गया और मुग़ल बादशाह औरंगजेब के मृत्यु के बाद  मुग़ल साम्राज्य भी बहुत दुर्बल हो गया और उसका कई भागो में विभाजन हो गया | इसी का फायदा उठाकर  अंग्रेजो ने हमारे भारत देश में पैर पसारने के लिए शुरुवात कर दी | उन्होंने एक एक करके सारे छोटी छोटी रियासतों को हराकर  अपना साम्राज्य पुरे भारत में फैला दिया | और यहाँ के संपत्ति की बेतहाशा लुट मचा दी | उन्होंने यहाँ की जनता पर अत्याचोरो का सिलसिला शुरू कर दिया |

   ब्रितोशो ने बड़ी ही चतुराई के साथ यहाँ के छोटे करगीरो और छोटे मोटे उद्योग का बेडा गर्क करा दिया | यंहा के करगीरो को बेरोजगार कर दिया | उन्होंने भारत की अर्थव्यवस्था पर ही अघात करके यहाँ के अर्थव्यवस्था का भट्टा बिठा दिया | और इंग्लॅण्ड का माल यहाँ पर साम ,दाम, दंड की निति से बेचने लगे |

    इस शोषण और अत्याचारों के बढ़ने से यहाँ के सैनिक जो अंग्रेजी फ़ौज में कम करते थे, जमींदार और कुछ राजा ने मिलकर अंग्रजो के खिलाफ एक संग्राम छेड़ दिया | इस संग्राम को ही १८५७ का स्वतंत्रता संग्राम  के नाम से जाना जाता है | जिसका आगाज मंगल पांडे नामक सैनिक ने अपने वरिष्ट अधिकारी को गोली मारकर किया था

इस संग्राम में भारत के वीर पुत्रो ने अपने जान की बाजी लगाकर लड़ाई की लेकिन उसमे उनको सफलता नहीं मिल की | १८५७ के संग्राम में  झाशी की राणी लक्ष्मीबाई,तात्या टोपे ,कुवरलाल ,नानासाहेब पेशवा ,मंगल पांडे  आदि वीरो ने महत्वपूर्ण योगदान दिया |  भले ही १८५७ के संग्राम में असफलता मिली हो लेकिन इस संग्राम से हर भारतीयों के मन में आशा की किरण जगा दी|

इस घटना के बाद इंग्लैंड की राणी ने भारत का राज्य सत्ता ईस्ट इंडिया कम्पनी से निकलकर अपने हातो में ले ली और उस संग्राम में हिन्दू मुस्लिम एक होकर लडे थे इसलिए अंग्रेजो ने यहाँ से ही हिन्दू मुस्लिम में दरार डालनी शुरू कर दी ताकि आगे चलकर हिन्दू और मुस्लिम एक होकर अंग्रेजो के खिलाफ एक ना हो सके |
इस घटना के बाद भारतीय स्वतंत्रता आन्दोलन का नेतृत्व राजा और महाराजो के हात से निकलकर शिक्षित युवा वो के हात में आ गया |

 बाद में १८८५ में कांग्रेस की स्थापना हुयी जिसके माध्यम से शांतिपूर्ण तरीके से आजादी की मांग की जाने लगी | इसमें भी आगे चलकर दो गुट हो गए एक गुट को शांतिपूर्ण तरीके पर भरोसा था उसे मवालवादी गुट तो जिन्हें अंग्रजो पर विश्वास नहीं था और वो अंगेजो के खिलाफ आन्दोलन करके संघर्ष करके आजादी की मांग करते उनको जहालवादी गुट कहा जाता था | इन में लोकमान्य तिलक ,महात्मा गाँधी ,गोपाल कृष्ण गोखले ,दादा भाई नौरोजी आदि मुख्य नेता थे|

इन सबसे हटकर एक और युवा वर्ग था जिनके मन में  अंग्रेजो के आत्याचारो के खिलाफ बहुत ही रोष था | और वो युवा जैसे को तैसा में विश्वास करते थे| इन युवायों ने बहुत ही बड़ा योगदान भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में दिया है | इन युवायों ने अपने देश के लिए अपने प्राणों का भी त्याग कर दिया | इनमे भगतसिंह ,राजगुरु ,सुखदेव ,चंद्रशेखर आझाद ,बटुकेश्वर दत्त अदि युवा शामिल थे| उन सबको हमारा शत शत नमन |

महात्मा गाँधी जी ने अफ्रीका से लौटने के बाद यहा पर अंग्रेज शाशन के खिलाफ सत्याग्रह और आन्दोलन शुरू किये थे| जिसमे सरदार वल्लभभाई पटेल का विशेष सहयोग था | सुभाष चन्द्र बोस जी ने आझाद हिन्द सेना के साथ मिलकर भारत की आजादी के लिए जंग शुरू कर दी थी |

 इन सबसे हारकर आखिर कर अंग्रेज शाशन ने 15 अगस्त १९४७ को भारत को आजादी देनी पड़ी |इसलिए दोस्तों हमें भारतीय स्वतंत्रता दिवस के इस मौके  पर  उन वीरो को याद करना और उन्हें नमन करना हमारा परम कर्तव्य है | और उन वीरो ने जिस भारत का सपना देखा था  उसे साकार करने में हम सबको योगदान देना होगा |  

दोस्तों इतना बोलकर मै अपने लम्बे होते जा रहे इस दो शब्दों को समाप्त करता हु और आप सब ने बड़ी शांतता पूर्ण तरीके से इसे सुना इसके लिए मै आप सब का आभारी भी हु | जय हिन्द जय भारत |


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